मानवता का पाठ पढ़ लिया, इस जीवन रूपी क़िताब में! अपनों से प्यार करूं मैं ख़ूब, न रखूं उ मानवता का पाठ पढ़ लिया, इस जीवन रूपी क़िताब में! अपनों से प्यार करूं मैं ख़ूब...
आधुनिकता के सभी साधनों से परिपूर्ण मैं प्रसन्न था ,पर सन्तुष्ट नहीं आधुनिकता के सभी साधनों से परिपूर्ण मैं प्रसन्न था ,पर सन्तुष्ट नहीं
सदाचार का पाठ हो , घर-घर सुबह व शाम। काम क्रोध मद दूर हो, नहीं रहे मन काम। सदाचार का पाठ हो , घर-घर सुबह व शाम। काम क्रोध मद दूर हो, नहीं रहे मन काम।
एक दिन कलम ने मेरी, मुझसे प्रश्न व्यंग्यमय पूछा, क्यों लिखती हो काव्य , नहीं क्या का एक दिन कलम ने मेरी, मुझसे प्रश्न व्यंग्यमय पूछा, क्यों लिखती हो काव्य , ...
कर्ण प्रिय वाणी तेरी, केश रात्रि की कालिमा। भक्ति की तू शक्ति, कर्ण प्रिय वाणी तेरी, केश रात्रि की कालिमा। भक्ति की तू शक्ति,
सुना रहा मैं आपको हर काव्य की दास्तान। सुना रहा मैं आपको हर काव्य की दास्तान।